Thursday, December 22, 2016

तैमूर.......

ख़ान संग काला करे, मुंह जब कोई कपूर,
तब दुनिया में आये है, एक नया तैमूर।
जेहादी इक सोच का, यह भी है परिणाम,
बर्बर आक्रांताओं का, बच्चों को दें नाम।
भले ही कितना दीजिये, इनको धन - सम्मान,
सदा देश वीरोध में, हर अनुयायी इस्लाम ।
लुटटेरे बन आये थे, अब भी रहे हैं लूट,
मूर्ख हिंदुओं, दूर करो अब ये परस्पर फूट।
हिन्दुस्तां बन जाएगा, इक दारुल-इस्लाम,
अग़र एक हम न हुए, ले मोदी का नाम,
विनती है "संजीव" की, सब मिल करें विचार,
अब इस्लामी सोच का, पूर्ण हो बाहिष्कार।............ संजीव मिश्रा 

1 comments:

Anonymous said...

i am a hindu....living in uae...here being an islamic country hindus are treated equally...u cannot say that islam is bad....i would request to kindly delete this poem...

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