शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

या हमारे लिए......



खेल है ज़िन्दगी इक तुम्हारे लिए,
जेल है उम्र भर की हमारे लिए,

अहमियत दोस्तों की तुम्हें कुछ नहीं,
मेल है आत्मा का हमारे लिए,

तुमको क्या है ख़बर , कौन मिट बैठा है,
कौन क्या है यहाँ पर हमारे लिए,

न ही समझे हो तुम, न समझ पाओगे,
किसको भेजा ख़ुदा ने हमारे लिए,

आज आओ चलो, हम करें फ़ैसला,
तुम हो “संजीव” के या हमारे लिए......

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